NCERT Solutions for Class 10 Hindi Path-3: Utsah / At Nahin Rahi Hai
इस पाठ में सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' रचित दो कविताएँ संकलित हैं — 'उत्साह' में कवि बादलों से क्रांति एवं परिवर्तन का आह्वान करते हैं, तथा 'अट नहीं रही है' में वसंत ऋतु की चहुँओर बिखरी अनुपम छटा का सजीव चित्रण किया गया है।
पाठ का सार एवं मुख्य बिंदु
पाठ्यपुस्तक के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न: कविता 'उत्साह' में कवि बादल से किसका आह्वान करता है?
उत्तर: कवि बादल को क्रांति और परिवर्तन के प्रतीक के रूप में देखते हुए उससे गरजने और बरसने का आह्वान करता है, जिससे धरती पर छाई निराशा और जड़ता को समाप्त कर नवीन ऊर्जा एवं उत्साह का संचार हो सके।
प्रश्न: 'उत्साह' कविता में बादल किन-किन प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है?
उत्तर: कवि बादल को कभी विद्रोही, कभी क्रांतिकारी और कभी जीवनदायिनी शक्ति के रूप में चित्रित करते हैं — यह सामाजिक-राजनैतिक परिवर्तन तथा सूखी, निराश धरती में नवजीवन भरने वाली शक्ति का प्रतीक है।
प्रश्न: 'अट नहीं रही है' कविता में वसंत ऋतु के सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है?
उत्तर: कवि ने वसंत ऋतु के सौंदर्य को इतना अधिक और चहुँ ओर व्याप्त बताया है कि वह किसी एक स्थान में समा ही नहीं पा रहा — पेड़-पौधों पर नए पत्ते, फूलों का खिलना, गमक और चटक हर दिशा में फैली हुई है।
प्रश्न: निराला की कविताओं में छायावादी शैली की कौन-सी विशेषताएँ मिलती हैं?
उत्तर: निराला की कविताओं में प्रकृति का मानवीकरण, अलंकारपूर्ण भाषा, कल्पनाशीलता तथा भावनाओं की गहन एवं सूक्ष्म अभिव्यक्ति छायावादी शैली की प्रमुख विशेषताएँ हैं, जो 'उत्साह' और 'अट नहीं रही है' दोनों में स्पष्ट दिखाई देती हैं।